Friday, 17 August 2012

माँ

कोयल की कूक सी लगती
 एक भोली सी मीठी माँ //

बर्तन ,चूल्हा , चक्की 

घर के गलियारे सी लगती माँ //

थकी-थकी सी आखें उसकी 

एक पीपल की छाया माँ //

फटी हुई सी धोती पहने 

सुबह काम पर जाती माँ //

बचा-कूचा कुछ सुखा लेकर 

बच्चो को खिलाती माँ //

खुद को भूका रखकर 

सबका ध्यान रखती माँ //

बड़ी -बड़ी  मुश्किलों से भी 

कभी नहीं हरी माँ //

आसुओं से नाम आखें 

सदा चुप रहती माँ //

बच्चो को कभी सुलाती 

थकी -थकी सी लगती माँ //

ममता की फिर नई कहानी 

सदा गूंजती रहती माँ //

~विपुल~

7 comments:

  1. मेरी पिछली पोस्ट में हुई परेशानियों के लिए अपने सभी followers से क्षमा चाहता हू //
    उम्मीद करता हु मेरी यह पोस्ट आप सभी को पसंद आयगी ..... में अपनी पोस्ट्स नूपुर की हेल्प से देवनागरी में पोस्ट करता रहूँगा।...आप सभी का धन्यवाद।....

    ReplyDelete
  2. कल 19/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर रचना...
    :-)

    ReplyDelete
  4. माँ बस माँ ही है और कुछ नहीं .......सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  5. superb expressions..
    Ma mom mommy.. each n everything about her is divine n lovely

    ReplyDelete