Tuesday, 6 November 2012

// इन आसुओं को आज तो बेहने दे //



बड़े  मुद्द्त से सहज कर रखा हे
इन आसुओं को आज तो बेहने दे//
मुझे मेरे हिस्से की ज़िन्दगी
आज तो कुछ जीने दे//

छुपाये रखे हे कई राज़ ता-उम्र अपने सीने में
आ ,आ बेठ दम-भर मेरे पास,
इन राज़ को हमराज़ होने दे//

तुझे समझ कहा हे
इन आसुओं की,
बेमोल .. बेभाव हे ये आसु
आज ये बहते हे तो इन्हें बहने दे//

बड़े मुद्दत से सहज कर रखा हे
इन आसुओं को आज तो बेहने दे//
मुझे मेरे हिस्से की ज़िन्दगी
आज तो कुछ जीने दे//

~विपुल ~

8 comments:

  1. उत्कृष्ट कविता ....!!!

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  2. बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति ........

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  3. बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना है |पढ़ कर बहुत अच्छा लगा |
    आशा

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  4. Nyc poem... Aansuoo ko behne do...

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  5. चर्चामंच के द्वारा आपके ब्लाग पर आना हुआ , आपको तथा आपके ब्लाग के पाठको को विनोद सैनी तथा (युनिक ब्‍लाग ) की तरफ से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाऐ
    यूनिक तकनकी ब्लाग पर भी पधारे

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  6. कोमल भाव लिए अति सुन्दर रचना...
    आपको सहपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ..
    :-)

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  7. "बड़े मुद्दत से सहज कर रखा हे
    इन आसुओं को आज तो बेहने दे//
    मुझे मेरे हिस्से की ज़िन्दगी
    आज तो कुछ जीने दे//"

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